Wednesday, September 2, 2026
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MurderCase: लव सेक्स और धोखा….और अंत में हत्या….

MurderCase: इंदौर। इंदौर शहर की रहने वाली एक नाबालिग को एक शादीशुदा 35 साल के व्यक्ति से प्रेम हो जाता है। वह उस व्यक्ति​ की पत्नी के साथ बिना शिकायत के रहना चाहती है। एक दिन नाबालिग अपने माता—पिता को छोड़कर उस व्यक्ति के साथ रहने के लिए उसके घर पहुंच जाती है। इसके बाद कहानी का अंत शुरू होता है…. लव सेक्स और धोखा… और अंत में हत्या MurderCase के साथ एक धोखे से शुरू हुई प्रेम कहानी का धोखे से अंत।

इंदौर के सरबटे बस स्टैंड इलाके में एक मध्यम परिवार रहता है। उस परिवार का मुखिया रामलाल परिवर्तित नाम के दो बेटे थे और उसकी पत्नी तीनों हंसी खुशी जीवनयापन कर रहे थे। उनका छोटा बेटा चिंटु परिवर्तित नाम जिसकी उम्र करीब 10 साल है, एक दिन अपनी मां निम्मा बाई परिवर्तित नाम से रक्षाबंधन के त्योहार के दिन कहता है….मां आज रक्षाबंधन है हमारी कोई बहन होती तो वह भी हमको राखी बांधती हम हर रक्षाबंधन को राखी बंधवाने के लिए बड़े पापा की लड़कियों का इंतजार करते हैं। हमें भी एक बहन चाहिए।
बेटे की यह बात चिंटु परिवर्तित नाम की मां उसके पापा रामलाल परिवर्तित नाम को बताती है। रामलाल बोलता है बच्चों की बात क्या भगवान ने हमको दो बेटे दिए हैं…उसकी मर्जी है इसलिए हमको बेटी नहीं दी।
निम्मा अपने पति से बोलती है देखो हमारा हंसता खेलता परिवार है उसमें एक बेटी की कमी है। बेटी होना बड़ा सौभाग्य माना जाता है। क्यों न हम एक बेटी कर लें।
पत्नी की बात सुन रामलाल को भी लगता है हां बेटी की कमी तो मुझे भी खलती है। बेटी सबकुछ होती है घर की शान और मर्यादा होती है। इतना सोंचकर रामलाल कुछ नहीं कहता और अपने काम में लग जाता है।
एक दिन मजदूरी करके घर लौटता है और देखता है दोनों भाई मजे से खेल रहे हैं। उनके हाथ में एक छोटी सी डॉल है। उसे बह बहन बनाकर उसके साथ खेल रहे हैं।
रात के समय जब दोनों बेटे सो रहे थे तब पति ने पत्नी से कहा सो गई क्या…
पत्नी का जवाब आया नहीं जी… जाग रही हूं। बताओ क्या बोल रहे हो।

रामलाल बिस्तर पर सोते हुए गहरी सांस लेते हुए बोला…. मैं सोंच रहा था कि क्यों न हम एक बेटी को जन्म दे ही देते हैं। हमको उसके कन्यादान का भी अवसर मिल जाएगा और कन्यादान हिंदू धर्म में सबसे बड़ा दान माना जाता है। भगवान ने हमारी सुन ली तो हम धन्य हो जाएंगे।
​इतना सुनते ही निम्मा बाई के दिमाग में भी यह सब कहानी चलने लगी और वह अपनी अजन्मी बेटी के कन्यादान के बारे में सोचने लगी। तभी पति ने पूछा क्या सोच रही हो। निम्मा बाई का जवाब आया कि यदि भगवान ने हमारी सुन ली तो हम धन्य हो जाएंगे। जब हमारी बेटी होगी उसका विवाह रचाकर हम उसका कन्यादान कर रहे होंगे।
रामलाल हंसते हुए बोला पगली अभी उसको दुनिया में तो आने दे। अभी तो उसके लिए कुछ करना भी होता है।
पति की यह बात सुनकर निम्मा समझ गई उसने अपने पति से हंसते हुए धीमी आवाज में कहा करो फिर आपको किसने रोका है….।
दोनों पति—पत्नी एक दूसरे से सट जाते हैं और आपस में लिपट जाते हैं….
कुछ देर के लिए पूरे कमरे में एक दम शांत माहौल हो जाता है सिर्फ पंखे के चलने की आवाज आती है।
दोनों की गर्म सांसे एक दूसरे को परम सुख की अनुभूति करा रही है। पत्नी—पति एक दूसरे को जकड़कर कसते हैं और लिप किस शुरू कर एक दूसरे के गुप्तांग को सहलाने लगते हैं।
सहलाते—सहलाते एक दूसरे के आलिंगन में समा जाते हैं और एक दूसरी दुनिया में कुछ देर के लिए खो जाते हैं अपनी अजन्मी बेटी की तलाश में…।
एक महीने बाद जब निम्मा का महीना मासिक धर्म नहीं आता है तो वह बहुत खुश होती है, लेकिन यह आत वह अपने पति से छुपाकर रखती है। एक दिन शाम के समय जब रामलाल मजदूरी करके वापस लौटा और खाना खाने के लिए बेठा तो पत्नी बहुत खुश नजर आ रही थी।
खाना खाते हुए पति ने पूछा आज बहुत खुश नजर आ रही हो क्या बात है… कहीं मायके वालों ने कोई खुशखबरी तो नहीं दे दी।
निम्मा ने मुछ नहीं बोला और हंसते हुए किचन में रोटी लेने के लिए चली गई।
पति के खाना खाने के बाद निम्मा ने भी खाना खाया और दोनों बेटों को सुलाकर दोनों रात में सोने के लिए अपने बिस्तर पर चले गए।
पत्नी ने अपने पति के चहरे को सहलाते MurderCase हुए बिस्तार पर कहा सुनो… हमारी भगवान ने सुन ली है।
मुझे महीना नहीं आया और अब खट्टा खाने को बहुत मन करता है।
पति हंसते हुए बोला अच्छा… यह तो बहुत ही खुशी की बात है अब भगवान से प्रार्थना है कि भगवान हमारे दो बेटे हैं और दोनों ही बहुत हो​शियार भी हैं अब एक चंचल सी और सुंदर सी बेटी भी दे दें। इसी प्रार्थना के साथ दोनों आपस में लिपटकर सो गए।

ठीक नौवे महीने में निम्मा को रात के समय में अचानक से पेट में दर्द हुआ। पति बगल में सो रहा था। निम्मा ने उसे जगाया…पति ने बिना देर किए जननी एक्सप्रेस को फोन किया। करीब आधा घंटे बाद जननी उनके दरवाजे पर थी।
पिता अपने दोनों बेटों को समझाकर पत्नी को जननी से अस्पताल लेकर गया।
अस्पताल में करीब दो घंटे तक निम्मा दर्द से कराहती रही आखिरी में एक बेटी को जन्म दिया। बेटी का जन्म होते ही निम्मा का पूरा दर्द अचानक से गायब हो गया और आंखों में खुशी के आंसु निकल आए।
नर्स ने नन्ही से परी को उसके पिता की गोद में लेवर रूम से बाहर लाकर दिया।
पिता का भी कोई खुशी का ठिकाना MurderCase नहीं रहा। पिता ने तुरंत सभी रिश्तेदारों को फोन किया और जब वह तीन दिन के बाद अस्पताल से घर लाई गई तो बेटी के जन्म की खुशी में पूरे मोहल्ले में मिठाई बंटवाई।
घर पर भी दोनों भाई बहुत खुश थे। उन्होंने भी बहन के आने की खुशी मनाई।

पूरा घर अब हर जरूरतों से पूरा हो गया था। घर में दो बेटे के साथ अब एक बहन भी थी। बहन का नाम छोटे बेटे चिंटु परिवर्तित नाम ने परी परिवर्तित नाम रखा। सभी उससे बहुत प्यार करते और उसको दुलारते।

घर और रिश्तेदारों में भी सबकी लाड़ली बेटी परी परिवर्तित नाम धीरे—धीरे बड़ी होने लगी।
उसका स्कूल पूरा हुआ तो वह कालेज MurderCase में पढ़ाई करने के लिए बीए स्नातक में प्रवेश लेती है। इसी दौरान आते जाते वह एक मैजिक में प्रतिदिन आती थी। उसी मैजिक का ड्राइवर उसे पसंद करने लगा। परी की उम्र और उसका यौवन और सुंदरता इतनी थी कि कोई भी देखे तो देखता ही रह जाए। लेकिन परी परिवर्तित नाम अपना किराया बचाने के चक्कर में मैजिक ड्राइवर MurderCase से टाइम पास के लिए बाते करने लगी।

मैजिक ड्राइवर भी उसके घर से कालेज और कालेज से घर तक छोड़ते समय यदि वह लेट हो जाती थी तो उसका इंतजार करता था।
एक दिन ड्राइवर ने परी से उसके मन की बात कह दी। परी ने सोचा ठीक है कालेज आते जाते किराया नहीं देना पड़ेगा जो पैसा बचेगा उससे कुछ किताबे खरीद लूंगी।

वह धीरे—धीरे उससे बातें करने लगी। एक दिन रात के समय में वह अपने घर की छत पर जाती है गर्मी का समय होता है तो पिता भी छत पर सोने के लिए मना नहीं करते हैं।
रात के समय में चांद को देखते हुए दोनों फोन पर रंगीन बाते करते हैं।
बाते करते—करते ड्राइवर उसके साथ संभोग की इच्छा जताता है तो वह मना कर देती है और दूसरी बातें करने लगते हैं, लेकिन योवन अवस्था में परी को भी कुछ कर गुजरने का मन होता है।
एक दिन तय होता है कि वे कालेज के समय में कहीं बाहर मिलेंगे।
दोनों एक होटल में जाते हैं, जहां एक कमरा बुक करते हैं। उस कमरे में दोनों के सिवा कोई नहीं होता है। दोनों ने पहले खूब प्यार भरी बातें की और बातें करते—करते एक दूसरे को सहलाने लगे।
ड्राइवर ने जैसे ही परी को होटो पर किस किया उसका पूरा शरीर जन्नाटे से गरम हो गया और एक प्यारी से गर्माहट शरीर के अंदर दौड़ गई।
दोनों एक दूसरे को किस करने लगे।
ड्राइवर ने अब धीरे से उसके बूब्स को टच किया…वह और चरम पर पहुंच गई। परी को यह पहली बार का अहसास अलग ही मजा दे रहा था। उसने ड्राइवर को कस के पकड़ लिया। फिर ड्राइवर MurderCase ने उसका गुप्तांग उसके हाथों में धीरे से रख दिया। परी उसको सहलाने लगी और उसे और ज्यादा मजा आने लगा। अब वह पूरी तरह से चरम पर पहुंच गई थी। ड्राइवर ने धीरे से परी के गुप्तांग को छूआ और सहलाने लगा…
परी के गुप्तांग से ड्राइवर की उंगलियों में गर्मी का असास हो रहा था और हल्का सा पानी चिपचिपा भी लग रहा था। उससे उसे परम सुख देने के लिए उंगली परी के गुतांग में अंदर तक डाल दी। उंगली के अंदर तक जाते ही परी को और मजा आने लगा और वह अब सहन नहीं कर पा रही थी।
परी चाहती थी कि ड्राइवर जल्दी से उसके गुप्तांग के अंदर उसका डाल दे….।
इस पहली बार के परम सुख के साथ ही जब परी को और ज्यादा मजा आने लगा तो उससे ड्राइवर के गुप्तांग को पकड़कर अपने गुप्तांग में डाल लिया। इसके बाद दोनों आलिंगन हो गए।
दोनों ही दूसरी दूनिया की शेर करने लगे।
ड्राइवर परी के गुप्तांग में अपना गुप्तांग धीरे—धीरे डालता और बाहर निकालता इस बीच परी को उसके शरीर में अजीब तरह की खुशी और गुद—गुदी हो रही थी, वह बोलती और थोड़ा तेज करो मजा आ रहा है।
करीब पांच मिनट तक अंदर—बाहर की गुत्थी चलती रही और अंत में ड्राइवर फारिक होकर बिस्तर में दूसरी तक चित्ता चारो हाथ—पैर फैलाकर गिर जाता है। और दोनों गहरी सांस लेते हैं।
जब दोनों दूसरी दूनिया से वापस लौटते हैं तो बिस्तर पूरी तरह से खून से सना हुआ था…।
खून देखकर परी डर गई अब क्या होगा…..।
ड्राइवर बोलता है पहली बार संभोग करते समय ऐसा होता है। दोबारा जब करेंगे तो नहीं होगा।
परी बोलती है हट पागल अब नहीं करूंगी एक बार हो गया।
वह होटल से घर जाती है और रात के समय में वह सब सोच रही होती है, जिस समय उसने पहली बार परसुख की प्राप्ति की थी। उसको वो पल याद कर बहुत ही खुशी हो रही थी।
इधर उसके माता—पिता और भाइयो का दिन आम दिनों की तरह ही गुजर रहा था, लेकिन परी के दिल में अब ड्राइवर पूरी तरह से घर बना चुका था।
परी को नहीं मालूम था कि ड्राइवर शादी—सुदा है।
एक दिन वह ड्राइवर को उसकी पत्नी के साथ बाजार में खरीदारी करते हुए देखती है तो वह घबरा जाती है।
रात में जब ड्राइवर का फोन आता है तो वह उससे उसकी शादी होने की बात पूछती है, तो वह कहता है कि शादी तो घर वालों की मर्जी से हो गई है, लेकिन मैं उसे प्रेम नहीं करता हूं। प्यार तो सिर्फ तुमसे करता हूं।
अब इस प्यार के दलदल में फंसी परी सोच रही थी कि उसके साथ हम बिस्तर हो गई, उसकी याद और उसके साथ होटल में बिताए हुए रंगीन पल उसे बार—बार अंदर से कचोठ रहे हैं।
एक दिन वह निर्णय लेती है और फैसला कर अपने माता—पिता को बता देती है।
एक लड़के से प्रेम और वह भी शादी—सुदा की बात सुनकर पति—पत्नी आक्रोशित हो जाते हैं और उसको डांटते हैं।
परी को समझाते हैं बेटा उसकी शादी हो गई है आप जो कर रही हो वह ठीक नहीं है। आपके लिए अच्छी नौकरी वाला लड़का ढूढ़ते हैं…। जल्द ही तुम्हारी शादी कर देंगे।
रामलाल और निम्मा ने परी के लिए पुलिस में नौकरी करने वाला लड़का भी देख लिया और वह परी को देखने उसके घर भी आया था, परी के रंग रूप को देखकर वह मना नहीं कर पाया और शादी के लिए हां कर दी।
अब समय बीतता जा रहा था। परी के मन में कुछ और ही चल रहा था।
उसने पुलिस वाले लड़के से शादी करने से मना कर दिया और माता—पिता को बिना बताए एक चिट्ठी लिखी और घर पर बिस्तर पर छोड़कर चली गई। और ड्राइवर के घर पहुंची।
ड्राइवर के घर पहुंचते ही, वहां झगड़ा शुरू हो गया, लेकिन ड्राइवर ने कुछ और प्लान कर अपने परिवार वालों को समझा लिया और वह उसके साथ रहने लगी।
परी के नाबालिग होने के कारण दोनों ने शादी भी नहीं की थी। वह टालता रहा और दोनों साथ रहने लगे। इस बीच परी के साथ उसने उसके घर कई बार रेप किया। इस दौरान उसकी अचानक से एक दिन तबीयत खराब हुई। ड्राइवर और उसके माता—पिता परी का इलाज कराने में आनाकानी करने लगे। इस बीच रात के समय में परी और ड्राइवर का झगड़ा हुआ। इसके बाद ड्राइवर और उसके माता—पिता ने दूसरे दिन उसका इलाज कराने के बहाने मैजिक पर लेकर इंदौर शहर से बाहर ले गए। बाहर सुनसान जगह देखकर ड्राइवर की मां ने पकड़कर उसका मुंह दबा दिया। ड्राइवर के पिता ने उसका गला दबाया। इस बीच ड्राइवर गाड़ी चला रहा था।
कुछ देर बाद जब उसकी सांस थम गई तो ड्राइवर के माता—पिता ने राहत की सांस ली। इसके बाद परी की लाश को एक कुएं में फेंक दिया। दो दिन के बाद ड्राइवर उस कुएं की मुंडेर पर गया तो देखा कि कुएं में परी की लाश तैर रही है।
वह घवरा गया और तेजी से मैजिक लेकर अपने घर गया और माता—पिता को पूरी बात बताई।
इन दो दिनों में किसी को भी परी की लाश कुएं में नहीं दिखाई दी क्योकि कुंआ अनयूज था। फिर रात के समय में तीनों मैजिक से कुएं पर पहुंचे और परी की लाश को बाहर निकाला और उसे एक तालाब में फेंकने के लिए लेकर गए। इस बार सावधानी ऐसी बरती कि लाश पानी में तैरती न दिखाई दे। और लाश के अलग—अलग हिस्सों में साड़ी से पत्थर बांध दिए और तालाब में फेंक दिया।
लेकिन उस तालाब में वर्षा कम होने के कारण पानी नीचे जाता गया और किसी ने तालाब में लाश होने की सूचना पुलिस को दी।
पुलिस ने शव को बाहर निकाला और उसकी शिनाख्त शुरू कर दी।
क्षेत्र के सभी थानों में इसकी सूचना भी फोटो के साथ प्रेषित कर दी।

पुलिस को पता चला कि उसकी गुमशुदगी दर्ज हुई है, जिसका पत्र भी उसके परिजनों ने थाने में जमा कराया था।
पुलिस ने रामलाल और निम्मा को थाने बुुलाया और शव की शिनाख्त कराई।
रामलाल और निम्मा ने जैसे ही परी के शव को देखा वह मर्चुरी रूम के बाहर ही फूट—फूटकर रोने लगे।
दोनों के मन में एक ही ख्याल चल रहा था, जिस बेटी के कन्यादान का सपना देखा था और उन्हीं हाथों से कंधा देना पड़ेगा। बेटी हमारी बात मान लेती तो और उसको प्यार में धोखा नहीं मिलता और वह सुखी जीवन जी रही होती।
पुलिस ने शव का पीएम कराकर परिजनों को सौंप दिया और राममाल की शिकायत पर आरोपित ड्राइवर और उसके माता—पिता को गिरफ्तार कर लिया, जिन्हें कोर्ट में पेश किया गया और परी की हत्या के आरोप में तीनों को जेल भेज दिया गया।

नोट: यह कहानी काल्पनिक है। इसके पात्रों के नाम और स्थान को बदल दिया गया है। इस घटना में किसी का नाम या जगह का सही पाया जाना एक संयोग मात्र है।

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