Bhopal Name Change Controversy: देशभर में शहरों के नाम बदलने (Bhopal Name Change Controversy) की राजनीति (Politics of Renaming Cities) लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। भाजपा शासित राज्यों में यह प्रक्रिया और तेज नज़र आती है। इलाहाबाद का प्रयागराज, फैजाबाद का अयोध्या, और अब एक बार फिर भोपाल (Bhopal) के नाम बदलने की सुगबुगाहट सामने आ रही है।
भोपाल का नाम बदलकर “भोजपाल” (Bhojpal) करने की कोशिशें पहले भी हो चुकी हैं। वहीं, गोंड समाज का कहना है कि भोपाल का असली नाम “भूपाल” (Bhupal) था, जो गोंड राजा भूपाल शाह सल्लाम से जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि आदिवासी संगठन इस मुद्दे को सांस्कृतिक अस्तित्व और पहचान से जोड़कर देख रहे हैं।
भोपाल का नाम बदलने का विवाद क्यों?
भोपाल मित्र परिषद और कुछ अन्य संगठन यह दावा करते रहे हैं कि भोपाल (Bhopal Name Change Controversy) का असली नाम भोजपाल था, जो परमार वंश के राजा भोज (Raja Bhoj) से जुड़ा हुआ है। लेकिन गोंड समाज महासभा (Gond Samaj Mahasabha) इस दावे का खंडन करते हुए कहता है कि शहर का नाम गोंड राजा भूपाल शाह के नाम पर पड़ा था।
मुख्य विवाद यही है कि – क्या यह शहर राजा भोज ने बसाया था या फिर गोंड राजा भूपाल ने?
गोंड राजाओं का इतिहास और भूपाल का सच
इतिहासकारों और कुछ साहित्यकारों (Bhopal Name Change Controversy) की पुस्तकों में साफ जिक्र है कि गोंडवाना क्षेत्र (Gondwana Region) पर गोंड राजाओं ने सदियों तक शासन किया। लेखक श्याम मुंशी की किताब “सिर्फ नक्शे कदम रह गए” में विस्तार से लिखा है कि सन 359 ईस्वी से 1781 ईस्वी तक भोपाल और आसपास गोंड राजाओं का शासन रहा।
इनमें से 10वें राजा थे भूपाल शाह सल्लाम (Bhupal Shah Sallam), जिनका शासन 650 ईस्वी के आसपास माना जाता है। गोंड प्रजा ने अपने राजा को ईश्वर समान मानकर इस बस्ती का नाम भूपाल रखा। यही नाम समय के साथ अंग्रेजों की भाषा और उच्चारण के चलते भोपाल हो गया।
भोपाल और राजा भोज का संबंध: मिथक या सच?
भोपाल से जुड़े एक और बड़े दावे में कहा जाता है कि परमार वंश के राजा भोज ने यहां बड़ा तालाब (Upper Lake) बनवाया था। लेकिन श्याम मुंशी की किताब में स्पष्ट किया गया है कि राजा भोज (Bhopal Name Change Controversy) ने भोजपुर (Bhojpur) क्षेत्र में भोज ताल का निर्माण कराया था, न कि भोपाल के बड़े तालाब का।
बड़ा तालाब असल में गोंड राजाओं की देन है, जिनके प्रयास से सीहोर जिले की नदियों का पानी इकट्ठा कर भोपाल के लिए यह जीवनदायिनी तालाब बन गया।
सबूत क्या कहते हैं?
श्याम मुंशी ने अपनी किताब में कई ऐतिहासिक सबूत दिए हैं:
- रेलवे स्टेशन का नाम: पुराने समय में रेलवे टिकट और स्टेशन प्लेटफार्म पर ‘भूपाल’ लिखा मिलता था।
- स्थानीय बुजुर्गों की गवाही: आज से 60 साल पहले तक लोग इस जगह को ‘भूपाल’ ही कहते थे।
- तालाब और डैम का इतिहास: कलियासौत डैम (Kaliasot Dam) और नदी गोंड कलिया द्वारा बनाए गए थे।
- गोंडवाना पर शासन: 63 गोंड राजाओं ने भोपाल और आसपास राज किया।
भोपाल पर मुस्लिम शासन की शुरुआत
गोंड शासन के अंत और मुस्लिम शासन की शुरुआत की कहानी भी बेहद रोचक है।
गिन्नौरगढ़ की रानी कमलावति (Kamla Vati) ने अफगानी पठान सरदार दोस्त मोहम्मद खां (Dost Mohammad Khan) से मदद मांगी थी। दुश्मनों को हराने के बाद रानी ने दोस्त मोहम्मद को भूपाल सौंप दिया। सौंप दिया से तात्पर्य, रानी कमलावती ने अपना बदला पूरा होने के बाद भूपाल धरोहर को तोहफे में दे दिया था। यहीं से 1720 के बाद भोपाल में मुस्लिम शासन की शुरुआत हुई।
क्या नाम बदलने से विकास होगा?
इतिहास बताता है कि नाम बदलने से किसी भी शहर का विकास नहीं होता। विकास जनता की जरूरतें पूरी करने, रोजगार देने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने से होता है।
गोंड समाज और कई इतिहासकारों का कहना है कि नाम बदलने से इतिहास के सच को मिटाया नहीं जा सकता। भोपाल गोंड राजाओं की धरोहर है, और इसे सम्मान देने की बजाय अगर नाम बदल दिया जाएगा तो यह सांस्कृतिक अन्याय होगा।
भोपाल नाम विवाद के मुख्य तथ्य
- भोपाल का पुराना नाम भूपाल था।
- गोंड राजा भूपाल शाह सल्लाम के नाम पर पड़ा।
- अंग्रेजों ने उच्चारण बदलकर ‘भोपाल’ किया।
- राजा भोज का बड़ा तालाब से कोई संबंध नहीं।
- नाम बदलने से विकास नहीं, राजनीति होती है।
सरकार को क्या करना चाहिए?
भोपाल का नाम बदलने की कवायद एक बार फिर से राजनीति के केंद्र में है। लेकिन इतिहास और सबूतों की मानें तो भोपाल का नाम गोंड राजा भूपाल शाह सल्लाम से जुड़ा हुआ है। अब सवाल यह है कि क्या नाम बदलने की बजाय इतिहास और संस्कृति को सुरक्षित रखने पर ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए?
FAQs
- भोपाल का असली नाम क्या था?
भोपाल का असली नाम भूपाल (Bhupal) था, जो गोंड राजा भूपाल शाह सल्लाम के नाम पर रखा गया था। अंग्रेजों ने बाद में उच्चारण बदलकर इसे भोपाल कर दिया।
- क्या राजा भोज ने भोपाल बसाया था?
नहीं, राजा भोज ने भोपाल नहीं बसाया था। उन्होंने भोजपुर क्षेत्र में भोज ताल का निर्माण कराया था। भोपाल का बड़ा तालाब गोंड राजाओं द्वारा बनवाया गया था।
- क्या भोपाल का नाम बदलकर भोजपाल करना सही है?
इतिहासकारों और गोंड समाज के अनुसार यह प्रयास सांस्कृतिक अन्याय है। नाम बदलने से शहर का विकास नहीं होता, बल्कि लोगों की ऐतिहासिक पहचान प्रभावित होती है।
