Maharaja Shankar Shah: उमरेठ में आदिवासी समाज के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महाराजा शंकर शाह (Maharaja Shankar Shah) और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह (Kunwar Raghunath Shah) का 168वां बलिदान दिवस 18 सितम्बर 2025 को बड़े धूमधाम से मनाया गया। यह कार्यक्रम बड़देव पेनठाना 52 क्वार्टर पानी टंकी तहसील उमरेठ में मनाया गया।
बड़ादेव की पूजा के साथ शुरू हुआ आयोजन
सर्व आदिवासी समाज के तत्वावधान में कार्यक्रम का आयोजन उत्साह से किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत बड़ादेव की पूजा और महा सुमरनी के साथ की गई। इसके बाद महाराजा शंकर शाह (Maharaja Shankar Shah) और कुंवर रघुनाथ शाह को पुष्प अर्पित कर उनकी वीरगाथाओं को याद किया। इस दौरान समाज के वरिष्ठ वक्ता और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संबोधित किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे। इस दौरान गोड़ समाज महासभा के ब्लाक अध्यक्ष वीपी परतेती, कार्यवाहक अध्यक्ष पवन मसराम, गोंड समाज महासभा युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष अरविंद उइके, सामाजिक कार्यकर्ता, अभिषेक बरकड़े, शैलेंद्र बरकड़े, जीएसयू नगर उपाध्यक्ष अर्जुन उइके, अरुण धुर्वे, अर्जुन, संजू सरयाम, देवी सिंह ककोड़िया और अन्य समाजजन मौजूद रहे। कार्यक्रम का संयोजन अरविंद उइके और सर्व आदिवासी समाज, तहसील उमरेठ (परासिया) द्वारा किया गया।

बलिदान की ऐतिहासिक गाथा
18 सितम्बर 1858 को अंग्रेजी हुकूमत ने गोंडवाना के राजा शंकर शाह (Maharaja Shankar Shah) और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह को विद्रोह भड़काने के आरोप में तोप के मुंह से बांधकर उड़ा दिया था। यह घटना भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक अमिट अध्याय है।
1857 का विद्रोह जब पूरे भारत में फैला, तब राजा शंकर शाह ने जनता और जमींदारों को एकजुट कर अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष का आह्वान किया था। उनके पुत्र रघुनाथ शाह ने भी इस लड़ाई में बढ़-चढ़कर साथ दिया।
अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष
जबलपुर में तैनात अंग्रेजी सेना की 52वीं रेजीमेंट का कमांडर ले.ज. क्लार्क अपने अत्याचारों के लिए कुख्यात था। उसने छोटे राजाओं और आम जनता पर अत्याचार की पराकाष्ठा कर दी थी।
जनता की पीड़ा देखकर राजा शंकर शाह (Maharaja Shankar Shah) ने संघर्ष की योजना बनाई। लेकिन अंग्रेजी गुप्तचरों ने धोखे से उनकी योजनाओं की जानकारी क्लार्क तक पहुंचा दी। इसके बाद पिता-पुत्र दोनों को गिरफ्तार कर निर्दयता से मौत के घाट उतार दिया गया।
आदिवासी समाज का गर्व
शंकर शाह और रघुनाथ शाह (Maharaja Shankar Shah) का बलिदान न केवल गोंड समाज बल्कि पूरे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के लिए प्रेरणास्रोत हैं। आज भी उनके बलिदान दिवस पर समाज गर्व के साथ उन्हें याद करता है और नई पीढ़ी को उनके साहस और देशभक्ति से परिचित कराता है।
