Friday, August 7, 2026
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MP Daily Wage Workers: एमपी सरकार करेगी छटनी, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की जाएगी नौकरी!

MP Daily Wage Workers: भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने नगरीय निकायों में वर्ष 2000 के बाद की गई दैनिक वेतनभोगी (Daily Wage Workers) कर्मचारियों (MP Daily Wage Workers) की नियुक्तियों पर सख्ती दिखाई है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने सभी नगर निगम आयुक्तों और नगर पालिका परिषदों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है कि आखिर यह नियुक्तियां किन आधारों पर की गईं और इनका वेतन किस स्रोत से दिया जा रहा है।

विभाग ने 25 अक्टूबर तक जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

⚖️ वर्ष 2000 से लागू था प्रतिबंध (Ban Imposed in 2000)

वित्त विभाग ने 28 मार्च 2000 को निर्देश जारी कर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों (Daily Wage Appointments) की नई नियुक्तियों पर प्रतिबंध लगाया था। यह नियम सभी विभागों (Departments), निगमों (Corporations), मंडलों (Boards) और सार्वजनिक उपक्रमों (Public Undertakings) पर लागू किया गया था।

इसके बावजूद कई नगरीय निकायों (Urban Bodies) में नियुक्तियां होती रहीं। इस पर अब नगरीय विकास एवं आवास विभाग (Urban Development and Housing Department) ने सख्त रुख अपनाया है।

🏢 कैलाश विजयवर्गीय ने की समीक्षा (Minister Kailash Vijayvargiya Reviewed the Matter)

पिछले सप्ताह मंत्री कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) और अपर मुख्य सचिव संजय दुबे (Sanjay Dubey) ने मंत्रालय में समीक्षा बैठक की। बैठक (MP Daily Wage Workers) के दौरान बताया गया कि कई निकायों में समय पर वेतन वितरण नहीं हो रहा है, खासकर दैनिक वेतनभोगियों का वेतन रुका हुआ है।

इस पर मंत्री ने पूछा कि जब वर्ष 2000 से नियुक्तियों पर रोक है, तो ऐसे कर्मचारी रखे कैसे गए? इसके बाद सभी निकायों से रिपोर्ट तलब की गई।

🧾 क्या है पूरा मामला? (Complete Case Explained)

यह प्रविधान 2000 में सभी संस्थाओं पर लागू किया गया था, जिसमें निगम, मंडल, विकास प्राधिकरण (Corporations, Boards, Development Authorities) और सार्वजनिक उपक्रम (Public Enterprises) भी शामिल थे। इसके बावजूद कई निकायों ने नियमों को दरकिनार करते हुए कर्मचारियों को दैनिक वेतन पर रखा।

2006 में कई कर्मचारियों को नियमित किया गया, और उमा देवी प्रकरण (Uma Devi Case) के तहत 2014 में उन कर्मचारियों को वेतनमान देकर विनियमित कर्मचारी (Regularized Employees) बनाया गया जिनकी सेवा अवधि 10 वर्ष से अधिक थी।

फिर भी नियम तोड़कर नियुक्तियां जारी रहीं। अब विभाग यह पता लगा रहा है कि नियुक्ति के समय कौन अधिकारी पदस्थ थे और वेतन कहां से दिया गया।

📌 जांच के मुख्य बिंदु (Key Points of Inquiry)

  • वर्ष 2000 से दैनिक वेतनभोगी नियुक्तियों पर रोक थी।
  • नगरीय निकायों में नियुक्तियां नियमों के विरुद्ध की गईं।
  • 25 अक्टूबर तक मांगी गई है विस्तृत रिपोर्ट।
  • मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने समीक्षा बैठक में उठाया मुद्दा।

🗣️ विपक्ष का विरोध और कर्मचारियों की चिंता (Opposition’s Reaction and Workers’ Concern)

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार (Umang Singhar) ने सरकार को चेताया कि “जिन्होंने शहरों को संवारा, उनकी रोजी-रोटी से खिलवाड़ न किया जाए।” उन्होंने कहा कि हजारों संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी (Contract and Daily Wage Workers) असुरक्षा में जी रहे हैं।

वहीं कर्मचारी महासंघ (Employees Federation) के प्रांताध्यक्ष रमेश राठौर (Ramesh Rathore) ने कहा कि केवल नगरीय निकाय ही नहीं, बल्कि लोक निर्माण, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, और विश्वविद्यालयों में भी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी पदस्थ हैं। सरकार को नीति बनाकर इन्हें रिक्त पदों पर समायोजित करना चाहिए।

FAQs

Q1. दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्तियों पर प्रतिबंध कब लगा था?

वित्त विभाग ने 28 मार्च 2000 को सभी सरकारी और अर्धसरकारी संस्थाओं में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्तियों पर प्रतिबंध लगाया था।

Q2. अब सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?

नगरीय विकास एवं आवास विभाग (Urban Development Department) ने सभी निकायों से रिपोर्ट मांगी है कि इन नियुक्तियों का आधार क्या था और किस अधिकारी की अनुमति से की गईं।

Q3. क्या इन कर्मचारियों को हटाया जा सकता है?

सरकार अभी रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट के आधार पर ही तय होगा कि कर्मचारियों का क्या भविष्य होगा — समायोजन या कार्रवाई।

Sanjeet Dhurwey
Sanjeet Dhurwey
संजीत कुमार धुर्वे एक वरिष्ठ पत्रकार और इक्षित वचन ग्रुप के एडिटर हैं। पत्रकारिता जगत में पिछले 14 साल से सक्रिय। वर्ष 2011 से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की और यह क्रम लगातार जारी है। 2011 से 2024 तक के इस पूरे सफर में एबीपी न्‍यूज, सामुदायिक रेडियो, दैनिक भास्कर, हरभिूमि, बंसल न्‍यूज चैनल व समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर बखूबी जिम्मेदारी निभाई है। मौसम, खेल, राजनीतिक और अपराध रिपोर्टिंग, इन विषयों पर इनकी रुच‍ि है। हालांकि इनकी पकड़ प्रशासनिक, हेल्‍थ, लाइफ स्‍टाइल की खबरों पर भी पकड़ मजबूत हैं। खबर को बेहतर से बेहतर तरीके से पाठकों तक पहुंचाने की इनकी कोशिश रहती है। जो सीखा है उसे निखारना और कुछ नया सीखने का क्रम जारी है।
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