Birsa Munda Jayanti: इकलेरहा ग्राम पंचायत में भगवान बिरसा मुंडा जयंती (Birsa Munda Jayanti) बड़े उत्साह और सम्मान के साथ मनाई गई। भगवान बिरसा मुंडा, जिन्हें धरती आबा (Birsa Munda Jayanti) भी कहा जाता है, ने जल, जंगल, जमीन (Water, Forest, Land) और आदिवासी अस्मिता (Tribal Identity) की रक्षा के लिए अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई लड़ी।
उनका जीवन स्वाभिमान, संघर्ष और स्वतंत्रता की प्रेरक गाथा है।

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इकलेरहा गाँव में जयंती समारोह : श्रद्धा और एकजुटता का प्रतीक
बड़ा देव मंदिर में हुई पूजा-अर्चना
शनिवार को ग्राम इकलेरहा के बड़ा देव मंदिर में पंचायत जनप्रतिनिधियों और समाजजनों ने भगवान बिरसा मुंडा (Birsa Munda Jayanti) के छायाचित्र पर तिलक लगाकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। “बिरसा मुंडा अमर रहें (Birsa Munda Lives Forever)” के गगनभेदी नारे लगाकर कार्यक्रम में जोश भर दिया गया।

जनप्रतिनिधियों और समाज के मुखियाओं की विशेष मौजूदगी
इस कार्यक्रम में समिति और पंचायत के अनेक पदाधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें प्रमुख हैं:
- ग्राम सरपंच जैवंती कुमरे
- साधना दास
- गोंड समाज महासभा (Birsa Munda Jayanti) प्रांतीय अध्यक्ष शशि परतेती
- ब्लॉक अध्यक्ष वी. पी. परतेती
- कार्यवाहक अध्यक्ष पवन मसराम
- युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष अरविंद उईके
- गंगा प्रसाद (बाबा), दिनेश भलावी
- मीडिया प्रभारी नगर अध्यक्ष प्रकाश धुर्वे
- मनजीत, गुड्डू भलावी, वीरेंद्र नवरेती
- पवन सूरज, दुर्गेश (कैटर्स), अजय इरपची
- लकी, बबलू इवनाती, शिव सागर, नंदकिशोर भलावी
- अखिलेश नवरेती
इसके अलावा पूरे सगा समाज व स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

बिरसा मुंडा का आदिवासी समाज पर योगदान (Contribution to Tribal Community)
- ब्रिटिश शासन के खिलाफ “उलगुलान” आंदोलन (Birsa Munda Jayanti) का नेतृत्व
- आदिवासी अधिकारों की सुरक्षा के लिए संघर्ष
- जल-जंगल-जमीन की अवधारणा को जनमानस तक पहुँचाया
- आदिवासी युवाओं के लिए प्रेरणादायक आदर्श
