Bageshwar Dham: शहडोल (Shahdol) जिले की अदालत ने बागेश्वर धाम (Bageshwar Dham) के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को एक बड़ी कानूनी राहत (Legal Relief) प्रदान की है। अदालत ने उनके खिलाफ धार्मिक भावनाएं भड़काने (Religious Sentiment Case) और आपत्तिजनक टिप्पणी (Offensive Remark Case) से जुड़ा परिवाद प्रथम दृष्टया अपराध सिद्ध न होने पर खारिज कर दिया है।
⚖️ मामला क्या था? (What Was the Case?)
संदीप तिवारी नामक व्यक्ति ने शास्त्री (Bageshwar Dham) के खिलाफ परिवाद दायर किया था। उनका आरोप था कि प्रयागराज महाकुंभ (Prayagraj Mahakumbh) के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने यह बयान दिया—
“जो महाकुंभ में नहीं आएगा, वह पछताएगा और देशद्रोही कहलाएगा।”
परिवादी ने इस कथन को असंवैधानिक, आपत्तिजनक और भड़काऊ बताते हुए भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 196, 197(2), 299, 352, 353 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66A, 67 के तहत कार्रवाई की मांग की थी।
🏛️ अदालत की सुनवाई और निर्णय (Court Proceedings and Judgment)
न्यायिक मजिस्ट्रेट सीताशरण यादव की अदालत (Bageshwar Dham) में मामले की सुनवाई हुई।
धीरेंद्र शास्त्री की ओर से अधिवक्ता समीर अग्रवाल ने कहा कि—
“शास्त्री जी के कथन धार्मिक और आध्यात्मिक प्रवचन की मर्यादा में थे। न तो किसी वर्ग का अपमान हुआ और न ही किसी को उकसाया गया।”
अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि परिवाद में कोई ठोस प्रमाण नहीं हैं। इसलिए अदालत ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ संज्ञान लेने से इंकार करते हुए परिवाद को निरस्त कर दिया।
💬 अधिवक्ता का बयान (Lawyer’s Statement)
निर्णय के बाद अधिवक्ता समीर अग्रवाल ने कहा—
“यह फैसला दर्शाता है कि अफवाहों और गलत व्याख्या के आधार पर किसी की छवि धूमिल नहीं की जा सकती। सत्य की जीत हुई है।”
FAQs
प्रश्न 1: क्या शहडोल कोर्ट ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ मामला खारिज कर दिया है?
उत्तर: हाँ, अदालत ने पाया कि परिवाद में कोई ठोस प्रमाण नहीं हैं, इसलिए धार्मिक भावनाएं भड़काने का मामला खारिज कर दिया गया।
प्रश्न 2: धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई थीं?
उत्तर: परिवादी ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 197(2), 299, 352, 353 और आईटी एक्ट की धारा 66A, 67 के तहत कार्रवाई की मांग की थी।
प्रश्न 3: अदालत के फैसले के बाद धीरेंद्र शास्त्री के अधिवक्ता ने क्या कहा?
उत्तर: अधिवक्ता समीर अग्रवाल ने कहा कि यह निर्णय सत्य की जीत है और यह दर्शाता है कि गलत व्याख्याओं से किसी की छवि खराब नहीं की जा सकती।
