Tribal Land Rights: मध्य प्रदेश में आदिवासियों (Tribal Communities) के जल, जंगल और जमीन (Water, Forest & Land Rights) पर कथित रूप से किए जा रहे अतिक्रमण और उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने (Tribal Land Rights) के आरोपों ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इसी संदर्भ में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आदिवासी विभाग के महासचिव कुंवर सुमित नर्रे ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए बड़ा बयान दिया—
“अगर आदिवासियों की जमीन पर कब्ज़ा होगा तो नहीं सहा जाएगा।”
यह बयान प्रतिरोध का प्रतीक बन चुका है और पूरे क्षेत्र में राजनीतिक तापमान तेज हो गया है।
🔷 मुद्दे की पृष्ठभूमि
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा हाल ही में विधानसभा (Tribal Land Rights) में उठाए गए मुद्दे में यह आरोप लगाया गया कि:
- सिंगरौली जिले के धिरौली क्षेत्र में 3500 हेक्टेयर आदिवासी वन भूमि
- सिंगल बिड के जरिए
- अडानी समूह को कोयला खनन के लिए आवंटित की गई है।
यह वही क्षेत्र है जिसे वर्ष 2023 तक संविधान की 5वीं अनुसूची (Fifth Schedule Protection) के अंतर्गत सुरक्षित माना जाता था, लेकिन 2025 तक इसे अधिसूचना बदलकर बाहर कर दिया गया।
🔷 5वीं अनुसूची हटाने पर सवाल
5वीं अनुसूची (Fifth Schedule Rights) का उद्देश्य आदिवासी (Tribal Land Rights) भूमि की सुरक्षा, उनका सांस्कृतिक संरक्षण और संसाधनों का नियंत्रण स्थानीय समुदाय को देना है। लेकिन आदिवासी नेताओं का दावा है कि:
| मुद्दा | आरोप |
|---|---|
| 5वीं अनुसूची की सुरक्षा | बिना जनसहमति हटाई गई |
| उद्योगपतियों को फायदा | सरकारी नियमों में ढील |
| पर्यावरणीय नियम | वन्यजीव व पर्यावरण संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन |
🔷 क्या कहते हैं कानून?
📌 अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी अधिनियम 2006 (Forest Rights Act 2006)
➡️ बिना ग्रामसभा की सहमति जमीन अधिग्रहण अवैध।
📌 पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 (Environmental Protection Act 1986)
➡️ किसी भी परियोजना से पहले पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) आवश्यक।
📌 वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act)
➡️ संरक्षित वन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर कटाई प्रतिबंधित।
🔷 6 लाख पेड़ काटने का आरोप
जहां पूरी दुनिया Solar Power (सौर ऊर्जा) और Renewable Energy (नवीकरणीय ऊर्जा) की तरफ बढ़ रही है, वहीं आरोप है कि:
👉 सिर्फ एक उद्योगपति (Industrial Lobby) के लिए
👉 6,00,000 पेड़ों की कटाई (Mass Deforestation)
👉 और हजारों आदिवासी परिवारों का विस्थापन योजना में शामिल है।
कुंवर सुमित नर्रे का कहना है:
“आदिवासी सिर्फ जमीन नहीं खो रहे, वे अपनी पहचान, संस्कृति और अस्तित्व खो रहे हैं।”
🔷 आदिवासियों की मांगें
1️⃣ 5वीं अनुसूची बहाल की जाए
2️⃣ जमीन आवंटन पर पुनर्विचार
3️⃣ ग्राम सभा की स्वीकृति को अनिवार्य किया जाए
4️⃣ पर्यावरणीय रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
🔷 निष्कर्ष
यह विवाद सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, संवैधानिक अधिकार और पर्यावरण संरक्षण का सवाल बन गया है। आने वाले समय में यह मुद्दा मध्य प्रदेश की राजनीति और जनभावना को गहराई से प्रभावित कर सकता है।
📌 FAQs
1️⃣ क्या सच में आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन (Tribal Land Rights) पर कब्जा किया जा रहा है?
हाँ, आदिवासी संगठनों और विपक्ष का आरोप है कि उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए नियम बदले गए हैं और आदिवासी भूमि को निजी कंपनियों को दिया जा रहा है। हालांकि सरकार इसका खंडन करती है।
2️⃣ क्या यह क्षेत्र पहले 5वीं अनुसूची (Fifth Schedule) के अंतर्गत था?
हाँ। दस्तावेजों के अनुसार 2023 तक यह क्षेत्र 5वीं अनुसूची में आता था, लेकिन 2025 तक इसे सूची से हटाया गया, जिससे कानूनी सुरक्षा खत्म हो गई।
3️⃣ 6 लाख पेड़ काटने के आरोप कितने गंभीर हैं?
यदि ऐसा होता है तो यह पर्यावरण और जलवायु संरक्षण के लिए बड़ा खतरा होगा और हजारों आदिवासियों के विस्थापन का कारण बन सकता है।
