Friday, August 7, 2026
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GST Rate Cut: मोदी का मास्टरस्ट्रोक या कांग्रेस की जीत! समझें कितना फायदा?

GST Rate Cut: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने हाल ही में जीएसटी दरों में बड़ा बदलाव किया है। अब पूरे देश में केवल दो जीएसटी (GST Rate Cut) स्लैब रह गए हैं— 5% और 18%। इस फैसले को बीजेपी जनता के लिए “बचत उत्सव” और मोदी का “मास्टरस्ट्रोक” बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे “जनता से 8 साल लूटने के बाद दिखावा” करार दे रही है।
राजनीति के इस गर्म माहौल के बीच सवाल उठता है कि वास्तव में इसका असर आम आदमी की जिंदगी, व्यापार और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा।

मोहन यादव का बचत उत्सव

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के ऐतिहासिक चौक बाजार में “बचत उत्सव” का आगाज किया।
उन्होंने दुकानदारों और ग्राहकों से सीधे संवाद किया, दुकानों पर स्टीकर्स लगाए और स्वदेशी वस्त्र खरीदे।
महिलाओं ने दरों में कटौती (GST Rate Cut) से खुश होकर मिठाई खिलाकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
मोहन यादव का कहना था – “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को दीपावली से पहले बचत का मीठा तोहफ़ा दिया है।”

कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मोदी और मोहन यादव सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी पहले दिन से जीएसटी (GST Rate Cut) को “गब्बर सिंह टैक्स” कहते रहे हैं।
पटवारी का आरोप है कि –

  • 8 साल तक जनता से लूटकर अडानी-अंबानी को फायदा पहुँचाया गया।
  • अब उसी टैक्स को कम करके ढोल पीटा जा रहा है।

कांग्रेस का दावा है कि जीएसटी दरें घटाना उनकी पुरानी मांग और राहुल गांधी के दबाव का नतीजा है।

नई जीएसटी दरें: सिर्फ दो स्लैब

नए नियमों के अनुसार—

  • 5% स्लैब: आटा, चावल, गेहूं, दालें, दूध, दही, सब्जियां, फल, अंडे, नमक, प्राकृतिक शहद और पेयजल (पैक्ड को छोड़कर)।
  • 18% स्लैब: लग्जरी आइटम्स और गैर-जरूरी वस्तुएं।

सोना-चांदी, पेट्रोल-डीजल, गैस सिलेंडर, स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसे उत्पादों पर कोई असर नहीं पड़ा है।

जनता पर असर, बचत का अनुमान

क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार—

  • शहरी उपभोक्ता को हर माह औसतन 1819 रुपए की बचत होगी।
  • ग्रामीण उपभोक्ता को औसतन 1154 रुपए की बचत होगी।
  • औसतन परिवार का मासिक खर्च 27% तक कम हो सकता है।

यह बचत धीरे-धीरे दिखेगी क्योंकि दुकानदारों के पास अभी पुराना स्टॉक मौजूद है।

पुराना स्टॉक और एमआरपी पर भ्रम

बाजार में अब भी बहुत सा पुराना स्टॉक मौजूद है।

  • इस पर पुरानी एमआरपी ही छपी होगी।
  • लेकिन दुकानदारों को बिल बनाते समय नई दरें लागू करनी होंगी। यानी ग्राहक को कटौती का लाभ हर हाल में मिलेगा।

उपभोक्ताओं के अधिकार और शिकायत प्रक्रिया

अगर कोई दुकानदार पुरानी एमआरपी पर ही सामान बेचता है, तो ग्राहक इन नंबरों पर शिकायत कर सकते हैं—

  • टोल फ्री नंबर: 1800-11-4000 या 1915
  • SMS/WhatsApp: 8800001915
  • “NCH” ऐप या consumerhelpline.gov.in

यह शिकायत सुबह 8 से शाम 8 बजे तक दर्ज कराई जा सकती है।

सरकार को टैक्स कटौती से फायदा?

सवाल उठता है कि टैक्स घटाने से सरकार को राजस्व में नुकसान होगा, तो फायदा क्या है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि—

  • लोगों की क्रय शक्ति बढ़ेगी।
  • महंगाई कम होगी।
  • उद्योगों की लागत घटेगी, उत्पादन बढ़ेगा।
  • रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
  • जीडीपी में तेजी आएगी।

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सोशल मीडिया पर बहस

सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर दो धड़े नजर आ रहे हैं—

  • बीजेपी समर्थक: इसे मोदी का मास्टरस्ट्रोक बता रहे हैं।
  • कांग्रेस समर्थक: कह रहे हैं कि यह राहुल गांधी की लगातार मांग और दबाव का नतीजा है।

कई लोग मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं कि जब जीएसटी लागू हुआ था तब इसे “सर्वश्रेष्ठ सुधार” बताया गया और अब दरें घटने पर इसे “मोदी का मास्टरस्ट्रोक” कहा जा रहा है।

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FAQs

Q1. क्या हर चीज पर नई एमआरपी दिखेगी?

नहीं। अभी पुरानी एमआरपी ही दिखेगी लेकिन बिल में नई दरें लागू होंगी।

Q2. किन चीजों पर असर नहीं होगा?

सोना-चांदी, पेट्रोल-डीजल, सिलेंडर, स्मार्टफोन और लैपटॉप।

Q3. क्या पुराने स्टॉक पर भी फायदा मिलेगा?

हाँ, ग्राहक को पूरा फायदा मिलेगा।

Q4. कितनी बचत होगी?

शहरी उपभोक्ता को 1819 रुपए और ग्रामीण को 1154 रुपए प्रति माह।

Q5. बिल से कैसे पता चलेगा?

टैक्स पेड बिल में नई दरें साफ दिखेंगी।

Q6. सरकार को फायदा कैसे होगा?

खपत बढ़ेगी, उत्पादन और रोजगार बढ़ेंगे, जीडीपी तेज होगी।

Q7. शिकायत कहाँ करें?

टोल फ्री: 1800-11-4000 या 1915

SMS/WhatsApp: 8800001915

“NCH” ऐप या वेबसाइट से भी शिकायत कर सकते हैं।

Sanjeet Dhurwey
Sanjeet Dhurwey
संजीत कुमार धुर्वे एक वरिष्ठ पत्रकार और इक्षित वचन ग्रुप के एडिटर हैं। पत्रकारिता जगत में पिछले 14 साल से सक्रिय। वर्ष 2011 से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की और यह क्रम लगातार जारी है। 2011 से 2024 तक के इस पूरे सफर में एबीपी न्‍यूज, सामुदायिक रेडियो, दैनिक भास्कर, हरभिूमि, बंसल न्‍यूज चैनल व समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर बखूबी जिम्मेदारी निभाई है। मौसम, खेल, राजनीतिक और अपराध रिपोर्टिंग, इन विषयों पर इनकी रुच‍ि है। हालांकि इनकी पकड़ प्रशासनिक, हेल्‍थ, लाइफ स्‍टाइल की खबरों पर भी पकड़ मजबूत हैं। खबर को बेहतर से बेहतर तरीके से पाठकों तक पहुंचाने की इनकी कोशिश रहती है। जो सीखा है उसे निखारना और कुछ नया सीखने का क्रम जारी है।
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