Sehore Fake Registry Scam: सीहोर (Sehore) जिले का जिला पंजीयक-उप पंजीयक कार्यालय (Registrar Office) इन दिनों भारी विवादों में है। आरोप है कि इस कार्यालय ने रेहटी तहसील (Rehti Tehsil) के 200 से अधिक किसानों (Sehore Fake Registry Scam) की फर्जी रजिस्ट्री (Fake Registry) करके उनकी लगभग 3500 एकड़ जमीनें पीएसीएल (PACL) की फर्जी कंपनियों के नाम कर दीं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस मामले पर 2016 में आदेश दिए और SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड – Securities and Exchange Board of India) ने 2022 में दस्तावेज मांगे, तब जिला पंजीयक कार्यालय ने सुप्रीम कोर्ट, SEBI और कलेक्टर तक को गलत जानकारी देकर गुमराह कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट और SEBI को गुमराह क्यों किया गया?
- सुप्रीम कोर्ट का आदेश (2016): कोर्ट ने SEBI से संपत्तियों के खसरे और क्रेता-विक्रेता की जानकारी मांगी।
- SEBI का पत्र (2022): 29 नवंबर 2022 को SEBI ने सीहोर कलेक्टर से जानकारी मांगी।
- जिला पंजीयक का जवाब (2023): 23 मई 2023 को पंजीयक ने लिखित में बताया कि ऐसे किसी भी दस्तावेज का रिकॉर्ड उनके पास नहीं है।
लेकिन सच इसके उलट था। किसान खुद उसी पंजीयक कार्यालय से प्रमाणित प्रति (Certified Copy) निकलवा चुके थे। इसका सीधा मतलब है कि अधिकारियों ने जानबूझकर गलत जानकारी दी।
एक-दूसरे को बचाने में जुटे अधिकारी
जब जांच की बात आई तो अधिकारी एक-दूसरे को बचाने में लग गए।
- कलेक्टर ने जांच जिला पंजीयक को सौंपी।
- पंजीयक ने उप पंजीयक बुधनी से दस्तावेज मांगे।
- सभी जगह से यही जवाब आया कि रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
यहां साफ दिखता है कि पूरी प्रक्रिया में ऊपर से नीचे तक मिलीभगत रही।
रेहटी तहसील कार्यालय की भूमिका
इस घोटाले में रेहटी तहसील कार्यालय की भूमिका भी संदिग्ध है।
- किसानों के नाम सही लिखे गए, लेकिन फोटो फर्जी लगाए गए।
- हस्ताक्षर भी किसानों से मिलते-जुलते बनाए गए।
- जिन किसानों की जमीनें रजिस्ट्री हुईं, वे सब रेहटी तहसील के ही थे।
यानी तहसील स्तर पर भी बड़े पैमाने पर धांधली हुई।
किन गांवों के किसानों की जमीनें फर्जी रजिस्ट्री हुईं?
यह फर्जीवाड़ा 11 से अधिक गांवों तक फैला हुआ था।
सगोनिया, बरखेड़ा, गेहूंखेड़ा, डोंगरी, बोरदाखेड़ा, बासनियाकलां, मरदानपुर, भड़कुल, मट्ठागांव, रैगांव, जाजना इन गांवों के लगभग 200 किसानों की जमीनों को फर्जी तरीके से बेचकर करोड़ों का घोटाला किया गया।
पीड़ित किसानों की आपबीती
सगोनिया गांव के किसान विजय सिंह यदुवंशी बताते हैं कि उनके खसरे (जैसे 9/1, 99/1, 102/1 आदि) की जमीनें पीएसीएल कंपनी की फर्जी कंपनियों के नाम कर दी गईं।
जब किसानों ने अपनी जमीन का बंटवारा या नामांतरण कराने की कोशिश की, तब उन्हें पता चला कि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमीनों पर रोक लगा रखी है।
- किसान SDM और तहसील कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां भी यही बताया गया कि उनकी जमीन सुप्रीम कोर्ट के आदेश से प्रतिबंधित है।
- तब किसानों ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली।
- कुछ किसानों को न्याय मिला, लेकिन कई मामले अब भी कोर्ट में लंबित हैं।
करोड़ों का नुकसान और मिलीभगत का खेल
इस पूरे घोटाले में:
- किसानों ने अपनी जमीन खोई।
- सरकार के राजस्व को करोड़ों का नुकसान हुआ।
- पंजीयक, तहसील कर्मचारी और रजिस्ट्री वेंडरों ने अवैध तरीके से मोटी रकम कमाई।
घोटाले की मुख्य बातें
- 200 किसानों की जमीनें फर्जी रजिस्ट्री में गईं।
- 3500 एकड़ जमीन का मामला।
- पीएसीएल की फर्जी कंपनियों के नाम रजिस्ट्री।
- सुप्रीम कोर्ट और SEBI को गुमराह किया गया।
- सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान।
FAQs
- सीहोर में किसानों की जमीन की फर्जी रजिस्ट्री का मामला क्या है?
यह मामला रेहटी तहसील के 200 किसानों की लगभग 3500 एकड़ जमीन की फर्जी रजिस्ट्री से जुड़ा है। जिला पंजीयक-उप पंजीयक कार्यालय ने इन जमीनों को पीएसीएल की फर्जी कंपनियों के नाम कर दिया।
- सुप्रीम कोर्ट और SEBI को कैसे गुमराह किया गया?
सुप्रीम कोर्ट और SEBI ने जब दस्तावेज मांगे, तो जिला पंजीयक कार्यालय ने लिखित में कहा कि उनके पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। जबकि किसानों ने उसी कार्यालय से प्रमाणित प्रति निकलवाई थी।
- इस घोटाले में किन-किन अधिकारियों की भूमिका रही?
जिला पंजीयक, उप पंजीयक, तहसील कार्यालय के कर्मचारी और रजिस्ट्री वेंडर—all की मिलीभगत सामने आई है। सभी ने एक-दूसरे को बचाने की कोशिश की।
