IAS Controversial Statement: मप्र में अजाक्स संगठन के प्रदेश अध्यक्ष आईएएस संतोष वर्मा (IAS Controversial Statement) के एक विवादित बयान ने प्रदेश की पूरी सियासत को हिला कर रख दिया है। इतना ही नहीं एक सूद्र IAS अधिकारी के बयान से पूरा ब्राह्मण समाज सड़कों पर है। इधर सरकार ने भी समाज में अराजकता फैलाने के आरोप में IAS अधिकारी को सोकाज नोटिस जारी किया है।
मप्र सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने IAS अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिन का समय दिया है। इन सात दिनों में जवाब नहीं देने पर एक तरफा कार्रवाई करने की भी बात कही है। इसी के साथ ही प्रदेश में पूरा ब्राह्मण समाज IAS अधिकारी पर कार्रवाई कर बर्खास्त करने की मांग कर रहा है।

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IAS अधिकारी ने क्या कहा था?
दरअसल 22 नवंबर को भोपाल में अजाक्स का प्रांतीय सम्मेलन आयोजित (IAS Controversial Statement) किया गया था। इस आयोजन में IAS अधिकारी संतोष वर्मा को अजाक्स का प्रांतीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हुए IAS अधिकारी संतोष वर्मा आरक्षण की बात कर रहे थे। तभी उन्होंने कहा कि आरक्षण तब तक लागू रहेगा, जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को दान न दे दें। साथ ही उन्होंने कहा कि कोई संबंध नहीं बना लें, यानी रिश्तेदारी न जोड़ ले। इस बयान के बाद उन्हें पूरे ब्राह्मण समाज ने घेर लिया।

प्रदेश में ब्राह्मण समाज का उग्र आंदोलन
IAS अधिकारी संतोष वर्मा के विवादित बयान के बाद पूरे प्रदेश में ब्राह्मण समाज (IAS Controversial Statement) ने आंदोलन और प्रदर्शन शुरू कर दिया है। ब्राह्मण समाज ने नर्मदापुरम, ग्वालियर, बुरहानपुर, इटारसी, पिपरिया, रायसेन, सीहोर समेत पूरे प्रदेश में प्रदर्शन किया। साथ ही अधिकारी को बर्खास्त करने की मांग की।
IAS अधिकारी ने क्यों की विवादित टिप्पणी
दरअसल देश में आरक्षण और क्रीमीलेयर का मुद्दा समय-समय गर्म हो जाता है। इसके कारण कई बार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग (IAS Controversial Statement) के लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आरक्षण को लेकर कई तरह की मांग उठाई जाती रही है। जबकि समाज में अभी भी अपर कास्ट के द्वारा अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय पर अत्याचार अभी भी जारी है। यह अत्याचार और भेदभाव का शिकार सामान्य लोगों को तो छोड़ ही दीजिए अधिकारी, कर्मचारी वर्ग भी इसका शिकार हैं। इसी के चलते देश में समाजवाद को खत्म करने और सभी को एक दृष्टि से देखने की मांग को लेकर यह बयान दिया गया था। जिस पर पूरे प्रदेश में बबाल खड़ा हो गया है।

आदिवासियों पर अत्याचार करता है ब्राह्मण समाज
मप्र की बात करें तो मप्र में आदिवासियों पर अत्याचार कोई नई बात नहीं है। ब्राह्मण समाज (IAS Controversial Statement) के लोगों के द्वारा आदिवासियों पर पेशाब करने की घटनाएं तक सामने आई है। इतना ही नहीं आदिवासियों की बेटियों पर भी अत्याचार ब्राह्मण समाज के लोगों के द्वारा किया गया है। यही जातिगत भेदभाव है।
दलितों पर अत्याचार भी अब आम बात है
मप्र की बात करें तो दलितों पर आज भी अत्याचार (IAS Controversial Statement) थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हमारे अकेले मप्र में ही कई घटनाएं ऐसी सामने आई है, जहां दलितों पर अत्याचार किया गया। मलावा क्षेत्र के खंडवा जिले में एक भंडारे में दलितों के लिए अलग से पंडाल लगाया गया था। वहीं मालवा क्षेत्र के उज्जैन संभाग में दलितों के दूल्हे को घोड़ी पर नहीं चढ़ने दिया गया। यह प्रमुख उदाहरण है जो जातिगत भेदभाव को दर्शाता है। इसी के कारण आदिवासी और दलित समाज आरक्षण को हमेशा के लिए जिंदा रखना चाहता है।
