Friday, August 7, 2026
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Singrauli Forest Cutting: सिंगरौली में पेड़ों की कटाई और कॉर्पोरेट विस्तार?

Singrauli Forest Cutting: मध्य प्रदेश के सिंगरौली (Singrauli) में पेड़ों की कटाई (Tree Cutting) और आदिवासी अधिकार (Tribal Rights) का मुद्दा तेजी से राजनीतिक और जन सरोकार (Singrauli Forest Cutting) का विषय बन गया है। विधायक हीरालाल अलावा ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (Twitter) पर आरोप लगाया कि सरकार विकास के नाम पर कॉर्पोरेट कंपनियों, विशेषकर अडाणी ग्रुप (Adani Group) का पक्ष ले रही है और आदिवासी समुदाय की जमीन, जंगल और भविष्य को कुर्बान कर रही है।

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जंगल नहीं, आदिवासियों का भविष्य काटा जा रहा है

अलावा के बयान में कहा गया कि सिंगरौली के बासी बेडदहा क्षेत्र में हज़ारों पेड़ों (Singrauli Forest Cutting) को रातों-रात काटा जा रहा है, जबकि वहां रहने वाले आदिवासी सदियों से इन पर निर्भर हैं। उनका कहना है कि:

“अडाणी के लिए सड़कें खुल रही हैं और आदिवासियों के लिए रास्ते बंद।”

यह वाक्य सिर्फ आरोप नहीं बल्कि उस संघर्ष की तस्वीर है जिसे सरकार, पुलिस बल और बुलडोज़र (Singrauli Forest Cutting) की ताक़त के सामने आदिवासियों द्वारा लड़ा जा रहा है।

हाई कोर्ट की फटकार और कानूनी उल्लंघन

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (MP High Court) ने हाल ही में बिना अनुमति पेड़ कटाई पर सख्त टिप्पणी की और निर्देश दिया कि एनजीटी हाई-पावर कमेटी (NGT High Power Committee) की मंजूरी के बिना एक भी पेड़ (Singrauli Forest Cutting) नहीं काटा जाए। कोर्ट ने यहां तक कहा:

“यदि पर्यावरण की कीमत समझनी है तो कुछ दिन दिल्ली जैसे प्रदूषित राज्यों में रहकर देखें।”

लेकिन इसके उलट, सिंगरौली में स्थित धिरावली कोल ब्लॉक (Dhirawali Coal Block) में तेजी से जंगल काटे जा रहे हैं। यह कार्रवाई PESA Act और Forest Rights Act का सीधा उल्लंघन बताया जा रहा है।

आदिवासी आंदोलन की तैयारी – संघर्ष बनाम विकास

स्थानीय समुदायों का कहना है कि उन्होंने ग्राम सभा (Gram Sabha) में भूमि हस्तांतरण को मंजूरी नहीं दी। बावजूद इसके, प्रशासनिक आदेशों से पेड़ों की कटाई जारी है। भीषण प्रदूषण से जूझ रहे मध्य प्रदेश के लिए यह कदम सवाल पैदा करता है—क्या विकास (Development) का मतलब सिर्फ खनन और उद्योग है?

अलावा ने चेतावनी दी:

“अगर आवाज़ नहीं सुनी गई तो आंदोलन सिखाएगा।”

📌 मध्य प्रदेश पर्यावरण रिपोर्ट (Highlights)

पैरामीटरस्थिति
PM2.5 स्तरराष्ट्रीय मानक से ऊपर
वन क्षेत्रलगातार कम
शिकायतेंग्राम सभा की अनुमति नहीं
परिणामकानूनी उल्लंघन के आरोप

क्या हाई कोर्ट सिंगरौली पर स्वत: संज्ञान लेगा?

चूंकि यह मामला मौजूदा पर्यावरणीय संकट (Environmental Crisis) और मानव अधिकारों से जुड़ा है, उम्मीद है कि न्यायालय इस घटना पर संज्ञान लेकर पारदर्शी जांच का आदेश देगा।

FAQs

Q1: सिंगरौली में जंगल कटाई (Forest Cutting) से सबसे ज्यादा प्रभावित कौन हो रहे हैं?

सबसे ज्यादा प्रभावित आदिवासी समुदाय (Tribal Communities) हैं, जो जल-जंगल-जमीन पर निर्भर हैं। उनके livelihood, सांस्कृतिक पहचान और पर्यावरणीय सुरक्षा पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है।

Q2: क्या पेड़ कटाई को लेकर हाई कोर्ट ने कोई आदेश दिया है?

हाँ, हाई कोर्ट ने बिना NGT High Power Committee की अनुमति पेड़ कटाई रोकने का आदेश दिया है। इसके बावजूद धिरावली क्षेत्र में कटाई जारी होने के आरोप लग रहे हैं।

Q3: क्या यह मामला PESA Act और Forest Rights Act का उल्लंघन है?

स्थानीय संगठनों और प्रतिनिधियों का दावा है कि ग्राम सभा की पूर्व स्वीकृति नहीं ली गई, जो इन दोनों कानूनों के तहत ज़रूरी है। इसलिए इसे कानूनी उल्लंघन माना जा रहा है।

Sanjeet Dhurwey
Sanjeet Dhurwey
संजीत कुमार धुर्वे एक वरिष्ठ पत्रकार और इक्षित वचन ग्रुप के एडिटर हैं। पत्रकारिता जगत में पिछले 14 साल से सक्रिय। वर्ष 2011 से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की और यह क्रम लगातार जारी है। 2011 से 2024 तक के इस पूरे सफर में एबीपी न्‍यूज, सामुदायिक रेडियो, दैनिक भास्कर, हरभिूमि, बंसल न्‍यूज चैनल व समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर बखूबी जिम्मेदारी निभाई है। मौसम, खेल, राजनीतिक और अपराध रिपोर्टिंग, इन विषयों पर इनकी रुच‍ि है। हालांकि इनकी पकड़ प्रशासनिक, हेल्‍थ, लाइफ स्‍टाइल की खबरों पर भी पकड़ मजबूत हैं। खबर को बेहतर से बेहतर तरीके से पाठकों तक पहुंचाने की इनकी कोशिश रहती है। जो सीखा है उसे निखारना और कुछ नया सीखने का क्रम जारी है।
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