Friday, August 7, 2026
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Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana: फसल बीमा के नाम पर किसानों के साथ धोखा!, प्रीमियम से कम मुआवजा

Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में पिछले तीन सालों से सोयाबीन की फसल खराब हो रही है। सोयाबीन की फसल खराब होने पर किसानों को बीमा (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) क्लेम उनके बैंक खाते से काटी गई रकम से भी कम है। ऐसे में किसानों ने बीमा क्लेम को लेकर जमकर आंदोलन किया। किसान जहां सड़कों पर लेटकर आंदोलन कर रहे हैं तो कहीं पानी में खड़े होकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि उनको जो फसल बीमा मिला है वह ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। धबोटी के किसानों ने बताया कि पिछले साल एक एकड़ में एक क्विंटल भी सोयाबीन नहीं निकला था, जबकि उनके खाते से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) के तहत 1500 रुपए प्रीमियम काट ली गई थी। जबकि बीमा मात्र 1269 रुपए मिला है। यह राशि बीमा प्रीमियम से भी कम है।

बारिश और रोग के कारण पूरी फसल बर्बाद

सीहोर जिले समेत आसपास ​के जिले शाजापुर और विदिशा जिले में भी किसानों की सोयाबीन की फसल (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) खराब हुई है। इसको लेकर किसानों ने शिकायतें की है। किसान मुकेश ने जानकारी दी कि उन्होंने 14 एकड़ में सोयाबीन की फसल की बोवनी की थी, लेकिन बारिश और अन्य कीट रोग के कारण पूरी फसल खराब हो गई। उनके बैंक खाते से 4400 प्रीमियम भी काटी गई थी, लेकिन तीन साल के बाद जो राशि किसान को मिली वह मात्र 3171 रुपए ही मिली है।

कैसे किया जाता है बीमा क्लेम का आंकलन?

सबसे पहले खरीफ और रबी सीजन में किसानों को पोर्टल पर पंजीकरण कराना पड़ता है।

फसल खराब होने पर कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारी व बीमा (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) एजेंट अलग-अलग चरणों में खेतों का सर्वे करते हैं।

सर्वे के बाद कंपनी के द्वारा किसान के पिछले पांच साल की औसत पैदावार का हिसाब होता है। ऐसे में यदि किसान के खेत की औसत पैदावार चार से पांच साल में कम रहती है तो बीमा क्लेम भी कम मिलता है।

कैसे होता है फसल का सर्वे?

किसान नेताओं ने जानकारी दी कि पूर्व में फसल का आकलन क्रॉप कटिंग तकनीक से किया जाता था। जबकि अब इसे सैटेलाइट इमेजिंग से जोड़ा है। इससे असल पैदावार से ज्यादा उत्पादन दिखा दिया जाता है और किसानों को कम मुआवजा मिलता है।

उदाहरण से समीझिये सैटेलाइट सर्वे

उदाहरण के तौर पर देवास जिले के चापड़ा में फिजिकल सर्वे में सोयाबीन की पैदावार 183 किलो प्रति हेक्टेयर आई थी, लेकिन सैटेलाइट सर्वे में इसे 869 किलो दिखाया गया। इसी आंकड़े के आधार पर मुआवजा तय किया गया।

Reena Dhurwey
Reena Dhurwey
रीना धुर्वे एक वरिष्‍ठ पत्रकार और इक्षित वचन ग्रुप में उप संपादक हैं। पत्रकारिता जगत में पिछले चार साल से सक्रिय हैं। वर्ष 2020 से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की और यह क्रम लगातार जारी है। पत्रकारिता की ट्रेनिंग लेने के बाद करियर स्‍थानीय वेबसाइट और समाचार पत्रों में सब एडिटर के रूप में अपनी सेवाएं दीं। अब इक्षित वचन ग्रुप के साथ जुड़कर काम कर रही हैं। लाइफ स्‍टाइल, खाना खजाना, महिलाओं से जुड़े मुद्दों और खबरों पर इनकी खास रुचि है। हालांकि अन्‍य खबरों पर भी ये खास पकड़ रखती है। खबर को बेहतर से बेहतर तरीके से पाठकों तक पहुंचाने की इनकी कोशिश रहती है। जो सीखा है उसे निखारना और कुछ नया सीखने का क्रम जारी है।
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